दो कान दिए हैं
दो आंखें दी हैं
दो हाथ दिए हैं
दो पैर दिए हैं
इसका मतलब है कि ईश्वर भी चाहता है कि हम भी चीज़ों को दोनों ओर से देखें, चीज़ों के दोनों पहलू देखें,
दो कहानियाँ एक निकिता और अतुल की और एक विवेक और श्रीजना की,
अतुल और निकिता की कहानी हमें अंदर से भय से भर देती है, हमारे अंदर पति-पत्नी के रिश्ते को लेकर नकारात्मकता का संचार करती है वहीं
विवेक और श्रीजना की कहानी हमें भावुक करती है, हमें रिश्तों की पवित्रता और उनकी आवश्यकता का बोध कराती है,
दरअसल मैं शादी को लेकर निगेटिव हो चुका हूँ मगर आपको समझना होगा और सिक्के के दोनों पहलुओं को ध्यानपूर्वक देखना होगा।
दुनिया आज भी सुन्दर है ❤️❤️
Comments
Post a Comment